उनके एक करोड़ रानियाँ थीं और ये स्वयं सन्तान उत्पन्न करनेमें समर्थ भी थे। परन्तु उन्हें उनमेंसे किसीके भी गर्भसे कोई सन्तान न हुई॥ ११॥
तस्य भार्यासहस्राणां सहस्राणि दशाभवन्।
सान्तानिकश्चापि नृपो न लेभे तासु सन्ततिम्॥ ११
उनके एक करोड़ रानियाँ थीं और ये स्वयं सन्तान उत्पन्न करनेमें समर्थ भी थे। परन्तु उन्हें उनमेंसे किसीके भी गर्भसे कोई सन्तान न हुई॥ ११॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.11 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 769) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/11/