श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.18

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

आत्मानं प्रकृतिष्वद्धा निधाय श्रेय आप्नुयात्।

राज्ञा तथा प्रकृतयो नरदेवाहिताधयः॥ १८

ātmānaṃ prakṛtiṣvaddhā nidhāya śreya āpnuyāt|

rājñā tathā prakṛtayo naradevāhitādhayaḥ|| 18

अर्थ

नरेन्द्र! जिस प्रकार राजा अपनी उपर्युक्त प्रकृतियोंके अनुकूल रहनेपर ही राज्यसुख भोग सकता है, वैसे ही प्रकृतियाँ भी अपनी रक्षाका भार राजापर छोड़कर सुख और समृद्धि लाभ कर सकती हैं॥ १८॥

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