सच्ची बात तो यह है कि जिसका मन अपने वशमें है, उसके ये सभी वशमें होते हैं। इतना ही नहीं, सभी लोक और लोकपाल भी बड़ी सावधानीसे उसे भेंट देकर उसकी प्रसन्नता चाहते हैं॥ २०॥
यस्यात्मानुवशश्चेत्स्यात्सर्वे तद्वशगा इमे।
लोकाः सपाला यच्छन्ति सर्वे बलिमतन्द्रिताः॥ २०
सच्ची बात तो यह है कि जिसका मन अपने वशमें है, उसके ये सभी वशमें होते हैं। इतना ही नहीं, सभी लोक और लोकपाल भी बड़ी सावधानीसे उसे भेंट देकर उसकी प्रसन्नता चाहते हैं॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 770) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/20/