और राजा चित्रकेतुसे कहा—‘राजन्! तुम्हारी पत्नीके गर्भसे एक पुत्र होगा, जो तुम्हें हर्ष और शोक दोनों ही देगा।’ यों कहकर अंगिरा ऋषि चले गये॥ २९॥
अथाह नृपतिं राजन् भवितैकस्तवात्मजः।
हर्षशोकप्रदस्तुभ्यमिति ब्रह्मसुतो ययौ॥ २९
और राजा चित्रकेतुसे कहा—‘राजन्! तुम्हारी पत्नीके गर्भसे एक पुत्र होगा, जो तुम्हें हर्ष और शोक दोनों ही देगा।’ यों कहकर अंगिरा ऋषि चले गये॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 771) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/29/