श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.30

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

सापि तत्प्राशनादेव चित्रकेतोरधारयत्।

गर्भं कृतद्युतिर्देवी कृत्तिकाग्नेरिवात्मजम्॥ ३०

sāpi tatprāśanādeva citraketoradhārayat|

garbhaṃ kṛtadyutirdevī kṛttikāgnerivātmajam|| 30

अर्थ

उस यज्ञावशेष प्रसादके खानेसे ही महारानी कृतद्युतिने महाराज चित्रकेतुके द्वारा गर्भ धारण किया, जैसे कृत्तिकाने अपने गर्भमें अग्‍निकुमारको धारण किया था॥ ३०॥

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