श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.14.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

सूत उवाच

परीक्षितोऽथ संप्रश्नं भगवान् बादरायणिः।

निशम्य श्रद्दधानस्य प्रतिनन्द्य वचोऽब्रवीत्॥ ८

parīkṣito'tha saṃpraśnaṃ bhagavān bādarāyaṇiḥ|

niśamya śraddadhānasya pratinandya vaco'bravīt|| 8

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! भगवान् शुकदेवजीने परम श्रद्धालु राजर्षि परीक्षित‍्का यह श्रेष्ठ प्रश्न सुनकर उनका अभिनन्दन करते हुए यह बात कही॥ ८॥

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