श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! तुम सावधान होकर यह इतिहास सुनो। मैंने इसे अपने पिता व्यासजी, देवर्षि नारद और महर्षि देवलके मुँहसे भी विधिपूर्वक सुना है॥ ९॥
शृणुष्वावहितो राजन्नितिहासमिमं यथा।
श्रुतं द्वैपायनमुखान्नारदाद्देवलादपि॥ ९
श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! तुम सावधान होकर यह इतिहास सुनो। मैंने इसे अपने पिता व्यासजी, देवर्षि नारद और महर्षि देवलके मुँहसे भी विधिपूर्वक सुना है॥ ९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.14.9 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 768) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/14/9/