राजन्! जैसे कुछ बीजोंसे दूसरे बीज उत्पन्न होते और नष्ट हो जाते हैं, वैसे ही भगवान्की मायासे प्रेरित होकर प्राणियोंसे अन्य प्राणी उत्पन्न होते और नष्ट हो जाते हैं॥ ४॥✎ 541
यथा धानासु वै धाना भवन्ति न भवन्ति च।
एवं भूतेषु भूतानि चोदितानीशमायया॥ ४
राजन्! जैसे कुछ बीजोंसे दूसरे बीज उत्पन्न होते और नष्ट हो जाते हैं, वैसे ही भगवान्की मायासे प्रेरित होकर प्राणियोंसे अन्य प्राणी उत्पन्न होते और नष्ट हो जाते हैं॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.15.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 775) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/15/4/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)