श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.15.5

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

वयं च त्वं च ये चेमे तुल्यकालाश्‍चराचराः।

जन्ममृत्योर्यथा पश्चात् प्राङ्नैवमधुनापि भोः॥ ५

vayaṃ ca tvaṃ ca ye ceme tulyakālāścarācarāḥ|

janmamṛtyoryathā paścāt prāṅnaivamadhunāpi bhoḥ|| 5

अर्थ

राजन्! हम, तुम और हमलोगोंके साथ इस जगत‍्में जितने भी चराचर प्राणी वर्तमान हैं—वे सब अपने जन्मके पहले नहीं थे और मृत्युके पश्चात् नहीं रहेंगे। इससे सिद्ध है कि इस समय भी उनका अस्तित्व नहीं है। क्योंकि सत्य वस्तु तो सब समय एक-सी रहती है॥ ५॥✎ 541

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #541 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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