जीवात्माने कहा—देवर्षिजी! मैं अपने कर्मोंके अनुसार देवता, मनुष्य, पशु-पक्षी आदि योनियोंमें न जाने कितने जन्मोंसे भटक रहा हूँ। उनमेंसे ये लोग किस जन्ममें मेरे माता-पिता हुए?॥ ४॥
कस्मिञ्जन्मन्यमी मह्यं पितरो मातरोऽभवन्।
कर्मभिर्भ्राम्यमाणस्य देवतिर्यङ्नृयोनिषु॥ ४
जीवात्माने कहा—देवर्षिजी! मैं अपने कर्मोंके अनुसार देवता, मनुष्य, पशु-पक्षी आदि योनियोंमें न जाने कितने जन्मोंसे भटक रहा हूँ। उनमेंसे ये लोग किस जन्ममें मेरे माता-पिता हुए?॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.16.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 778) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/16/4/