इसलिये तुम अपने शरीरमें आ जाओ और शेष आयु अपने सगे-सम्बन्धियोंके साथ ही रहकर व्यतीत करो। अपने पिताके दिये हुए भोगोंको भोगो और राजसिंहासनपर बैठो॥ ३॥
कलेवरं स्वमाविश्य शेषमायुः सुहृद्वृतः।
भुङ्क्ष्व भोगान् पितृप्रत्तानधितिष्ठ नृपासनम्॥ ३
इसलिये तुम अपने शरीरमें आ जाओ और शेष आयु अपने सगे-सम्बन्धियोंके साथ ही रहकर व्यतीत करो। अपने पिताके दिये हुए भोगोंको भोगो और राजसिंहासनपर बैठो॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.16.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 778) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/16/3/