श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.16.60

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

सुखाय दुःखमोक्षाय कुर्वाते दम्पती क्रियाः।

ततोऽनिवृत्तिरप्राप्तिर्दुःखस्य च सुखस्य च॥ ६०

sukhāya duḥkhamokṣāya kurvāte dampatī kriyāḥ|

tato'nivṛttiraprāptirduḥkhasya ca sukhasya ca|| 60

अर्थ

जगत‍्के सभी स्त्री-पुरुष इसलिये कर्म करते हैं कि उन्हें सुख मिले और उनका दुःखोंसे पिण्ड छूटे; परन्तु उन कर्मोंसे न तो उनका दुःख दूर होता है और न उन्हें सुखकी ही प्राप्ति होती है॥ ६०॥

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