श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.17.20

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

गुणप्रवाह एतस्मिन् कः शापः को न्वनुग्रहः।

कः स्वर्गो नरकः को वा किं सुखं दुःखमेव वा॥ २०

guṇapravāha etasmin kaḥ śāpaḥ ko nvanugrahaḥ|

kaḥ svargo narakaḥ ko vā kiṃ sukhaṃ duḥkhameva vā|| 20

अर्थ

यह जगत् सत्त्व, रज आदि गुणोंका स्वाभाविक प्रवाह है। इसमें क्या शाप, क्या अनुग्रह, क्या स्वर्ग, क्या नरक और क्या सुख, क्या दुःख॥ २०॥

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