sukhaṃ duḥkhaṃ mṛtirjanma śāpo'nugraha eva ca|| 29
अर्थ
जीवोंको भगवान्की लीलासे ही देहका संयोग होनेके कारण सुख-दुःख, जन्म-मरण और शाप-अनुग्रह आदि द्वन्द्व प्राप्त होते हैं॥ २९॥✎ 546547548
देहिनां देहसंयोगाद् द्वन्द्वानीश्वरलीलया।
सुखं दुःखं मृतिर्जन्म शापोऽनुग्रह एव च॥ २९
जीवोंको भगवान्की लीलासे ही देहका संयोग होनेके कारण सुख-दुःख, जन्म-मरण और शाप-अनुग्रह आदि द्वन्द्व प्राप्त होते हैं॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.17.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 790) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/17/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)