श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.23

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

हतपुत्रा दितिः शक्रपार्ष्णिग्राहेण विष्णुना।

मन्युना शोकदीप्तेन ज्वलन्ती पर्यचिन्तयत्॥ २३

hataputrā ditiḥ śakrapārṣṇigrāheṇa viṣṇunā|

manyunā śokadīptena jvalantī paryacintayat|| 23

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहने लगे—परीक्षित्! भगवान् विष्णुने इन्द्रका पक्ष लेकर दितिके दोनों पुत्र हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्षको मार डाला। अतः दिति शोककी आगसे उद्दीप्त क्रोधसे जलकर इस प्रकार सोचने लगी॥ २३॥

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