योगेश्वर इन्द्रने देखा कि यह अच्छा अवसर हाथ लगा। वे योगबलसे झटपट सोयी हुई दितिके गर्भमें प्रवेश कर गये॥ ६१॥✎ 552
लब्ध्वा तदन्तरं शक्रो निद्रापहृतचेतसः।
दितेः प्रविष्ट उदरं योगेशो योगमायया॥ ६१
योगेश्वर इन्द्रने देखा कि यह अच्छा अवसर हाथ लगा। वे योगबलसे झटपट सोयी हुई दितिके गर्भमें प्रवेश कर गये॥ ६१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.18.61 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 798) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/18/61/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)