श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.61

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

लब्ध्वा तदन्तरं शक्रो निद्रापहृतचेतसः।

दितेः प्रविष्ट उदरं योगेशो योगमायया॥ ६१

labdhvā tadantaraṃ śakro nidrāpahṛtacetasaḥ|

diteḥ praviṣṭa udaraṃ yogeśo yogamāyayā|| 61

अर्थ

योगेश्‍वर इन्द्रने देखा कि यह अच्छा अवसर हाथ लगा। वे योगबलसे झटपट सोयी हुई दितिके गर्भमें प्रवेश कर गये॥ ६१॥✎ 552

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #552 शब्दोंके बीचका स्थान: लगा,तब → लगा, तब

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