श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.18.62

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

चकर्त सप्तधा गर्भं वज्रेण कनकप्रभम्।

रुदन्तं सप्तधैकैकं मा रोदीरिति तान् पुनः॥ ६२

cakarta saptadhā garbhaṃ vajreṇa kanakaprabham|

rudantaṃ saptadhaikaikaṃ mā rodīriti tān punaḥ|| 62

अर्थ

उन्होंने वहाँ जाकर सोनेके समान चमकते हुए गर्भके वज्रके द्वारा सात टुकड़े कर दिये। जब वह गर्भ रोने लगा, तब उन्होंने ‘मत रो, मत रो’ यह कहकर सातों टुकड़ोंमेंसे एक-एकके और भी सात टुकड़े कर दिये॥ ६२॥✎ 552

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #552 शब्दोंके बीचका स्थान: लगा,तब → लगा, तब

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