परीक्षित्! पति-पत्नीमेंसे एक भी कोई काम करता है, तो उसका फल दोनोंको होता है। इसलिये यदि पत्नी (रजोधर्म आदिके समय) यह व्रत करनेके अयोग्य हो जाय तो बड़ी एकाग्रता और सावधानीसे पतिको ही इसका अनुष्ठान करना चाहिये॥ १८॥✎ 5585595605611614
कृतमेकतरेणापि दम्पत्योरुभयोरपि।
पत्न्यां कुर्यादनर्हायां पतिरेतत् समाहितः॥ १८
परीक्षित्! पति-पत्नीमेंसे एक भी कोई काम करता है, तो उसका फल दोनोंको होता है। इसलिये यदि पत्नी (रजोधर्म आदिके समय) यह व्रत करनेके अयोग्य हो जाय तो बड़ी एकाग्रता और सावधानीसे पतिको ही इसका अनुष्ठान करना चाहिये॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.19.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 803) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/19/18/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)