श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.19.22

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

श्वोभूतेऽप उपस्पृश्य कृष्णमभ्यर्च्य पूर्ववत्।

पयःशृतेन जुहुयाच्चरुणा सह सर्पिषा।

पाकयज्ञविधानेन द्वादशैवाहुतीः पतिः॥ २२

śvobhūte'pa upaspṛśya kṛṣṇamabhyarcya pūrvavat|

payaḥśṛtena juhuyāccaruṇā saha sarpiṣā|

pākayajñavidhānena dvādaśaivāhutīḥ patiḥ|| 22

अर्थ

उस दिन प्रातःकाल ही स्नान करके पूर्ववत् विष्णुभगवान्का पूजन करे और उसका पति पाकयज्ञकी विधिसे घृतमिश्रित खीरकी अग्‍निमें बारह आहुति दे॥ २२॥

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