अब मैं अपने मन, इन्द्रिय और प्राणोंको वशमें करके ऐसा प्रयत्न करूँगा कि फिर अपनेको घोर अन्धकारमय नरकमें न डालूँ॥ ३५॥✎ 498
सोऽहं तथा यतिष्यामि यतचित्तेन्द्रियानिलः।
यथा न भूय आत्मानमन्धे तमसि मज्जये॥ ३५
अब मैं अपने मन, इन्द्रिय और प्राणोंको वशमें करके ऐसा प्रयत्न करूँगा कि फिर अपनेको घोर अन्धकारमय नरकमें न डालूँ॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 710) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/2/35/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)