श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.43

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

हित्वा कलेवरं तीर्थे गङ्गायां दर्शनादनु।

सद्यः स्वरूपं जगृहे भगवत्पार्श्ववर्तिनाम्॥ ४३

hitvā kalevaraṃ tīrthe gaṅgāyāṃ darśanādanu|

sadyaḥ svarūpaṃ jagṛhe bhagavatpārśvavartinām|| 43

अर्थ

उनका दर्शन पानेके बाद उन्होंने उस तीर्थस्थानमें गंगाके तटपर अपना शरीर त्याग दिया और तत्काल भगवान्‌के पार्षदोंका स्वरूप प्राप्त कर लिया॥ ४३॥

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