श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.7

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

अयं हि कृतनिर्वेशो जन्मकोट्यंहसामपि।

यद् व्याजहार विवशो नाम स्वस्त्ययनं हरेः॥ ७

ayaṃ hi kṛtanirveśo janmakoṭyaṃhasāmapi|

yad vyājahāra vivaśo nāma svastyayanaṃ hareḥ|| 7

अर्थ

यमदूतो! इसने कोटि-कोटि जन्मोंकी पाप-राशिका पूरा-पूरा प्रायश्चित्त कर लिया है। क्योंकि इसने विवश होकर ही सही, भगवान्‌के परम कल्याणमय (मोक्षप्रद) नामका उच्चारण तो किया है॥ ७॥

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