श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.8

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

एतेनैव ह्यघोनोऽस्य कृतं स्यादघनिष्कृतम्।

यदा नारायणायेति जगाद चतुरक्षरम्॥ ८

etenaiva hyaghono'sya kṛtaṃ syādaghaniṣkṛtam|

yadā nārāyaṇāyeti jagāda caturakṣaram|| 8

अर्थ

जिस समय इसने ‘नारायण’ इन चार अक्षरोंका उच्चारण किया, उसी समय केवल उतनेसे ही इस पापीके समस्त पापोंका प्रायश्चित्त हो गया॥ ८॥✎ 496

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #496 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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