श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.3.3

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

श्रीशुक उवाच

भगवत्पुरुषै राजन् याम्याः प्रतिहतोद्यमाः।

पतिं विज्ञापयामासुर्यमं संयमनीपतिम्॥ ३

bhagavatpuruṣai rājan yāmyāḥ pratihatodyamāḥ|

patiṃ vijñāpayāmāsuryamaṃ saṃyamanīpatim|| 3

अर्थ

श्रीशुकदेवजीने कहा—परीक्षित्! जब भगवान्‌के पार्षदोंने यमदूतोंका प्रयत्न विफल कर दिया, तब उन लोगोंने संयमनीपुरीके स्वामी एवं अपने शासक यमराजके पास जाकर निवेदन किया॥ ३॥

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