यमदूतोंने कहा—प्रभो! संसारके जीव तीन प्रकारके कर्म करते हैं—पाप, पुण्य अथवा दोनोंसे मिश्रित। इन जीवोंको उन कर्मोंका फल देनेवाले शासक संसारमें कितने हैं?॥ ४॥
कति सन्तीह शास्तारो जीवलोकस्य वै प्रभो।
त्रैविध्यं कुर्वतः कर्म फलाभिव्यक्तिहेतवः॥ ४
यमदूतोंने कहा—प्रभो! संसारके जीव तीन प्रकारके कर्म करते हैं—पाप, पुण्य अथवा दोनोंसे मिश्रित। इन जीवोंको उन कर्मोंका फल देनेवाले शासक संसारमें कितने हैं?॥ ४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.3.4 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 712) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/3/4/