श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.36

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

कृतपादः सुपर्णांसे प्रलम्बाष्टमहाभुजः।

चक्रशङ्खासिचर्मेषुधनुःपाशगदाधरः ॥ ३६

kṛtapādaḥ suparṇāṃse pralambāṣṭamahābhujaḥ|

cakraśaṅkhāsicarmeṣudhanuḥpāśagadādharaḥ || 36

अर्थ

उस समय भगवान् गरुड़के कंधोंपर चरण रखे हुए थे। विशाल एवं हृष्ट-पुष्ट आठ भुजाएँ थीं; उनमें चक्र, शंख, तलवार, ढाल, बाण, धनुष, पाश और गदा धारण किये हुए थे॥ ३६॥✎ 511

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #511 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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