श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.50

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अथ मेऽभिहितो देवस्तपोऽतप्यत दारुणम्।

नव विश्‍वसृजो युष्मान् येनादावसृजद्विभुः॥ ५०

atha me'bhihito devastapo'tapyata dāruṇam|

nava viśvasṛjo yuṣmān yenādāvasṛjadvibhuḥ|| 50

अर्थ

उस समय मैंने उन्हें आज्ञा दी कि तप करो। तब उन्होंने घोर तपस्या की और उस तपस्याके प्रभावसे पहले-पहल तुम नौ प्रजापतियोंकी सृष्टि की॥ ५०॥✎ 512

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #512 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्‌ने

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