उस समय मैंने उन्हें आज्ञा दी कि तप करो। तब उन्होंने घोर तपस्या की और उस तपस्याके प्रभावसे पहले-पहल तुम नौ प्रजापतियोंकी सृष्टि की॥ ५०॥✎ 512
अथ मेऽभिहितो देवस्तपोऽतप्यत दारुणम्।
नव विश्वसृजो युष्मान् येनादावसृजद्विभुः॥ ५०
उस समय मैंने उन्हें आज्ञा दी कि तप करो। तब उन्होंने घोर तपस्या की और उस तपस्याके प्रभावसे पहले-पहल तुम नौ प्रजापतियोंकी सृष्टि की॥ ५०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.50 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 723) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/4/50/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#512 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने