जब मैंने उनमें शक्ति और चेतनाका संचार किया तब देवशिरोमणि ब्रह्मा सृष्टि करनेके लिये उद्यत हुए। परन्तु उन्होंने अपनेको सृष्टिकार्यमें असमर्थ-सा पाया॥ ४९॥✎ 512
स वै यदा महादेवो मम वीर्योपबृंहितः।
मेने खिलमिवात्मानमुद्यतः सर्गकर्मणि॥ ४९
जब मैंने उनमें शक्ति और चेतनाका संचार किया तब देवशिरोमणि ब्रह्मा सृष्टि करनेके लिये उद्यत हुए। परन्तु उन्होंने अपनेको सृष्टिकार्यमें असमर्थ-सा पाया॥ ४९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.49 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 723) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/4/49/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#512 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीभगवान् ने → श्रीभगवान्ने