श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.5.34

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

एतस्मिन् काल उत्पातान् बहून् पश्यन् प्रजापतिः।

पूर्ववन्‍नारदकृतं पुत्रनाशमुपाशृणोत्॥ ३४

etasmin kāla utpātān bahūn paśyan prajāpatiḥ|

pūrvavannāradakṛtaṃ putranāśamupāśṛṇot|| 34

अर्थ

दक्षप्रजापतिने देखा कि आजकल बहुत-से अशकुन हो रहे हैं। उनके चित्तमें पुत्रोंके अनिष्टकी आशंका हो आयी। इतनेमें ही उन्हें मालूम हुआ कि पहलेकी भाँति अबकी बार भी नारदजीने मेरे पुत्रोंको चौपट कर दिया ॥ ३४॥

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