उन्हें अपने पुत्रोंकी कर्तव्यच्युतिसे बड़ा शोक हुआ और वे नारदजीपर बड़े क्रोधित हुए। उनके मिलनेपर क्रोधके मारे दक्षप्रजापतिके होठ फड़कने लगे और वे आवेशमें भरकर नारदजीसे बोले॥ ३५॥
चुक्रोध नारदायासौ पुत्रशोकविमूर्च्छितः।
देवर्षिमुपलभ्याह रोषाद्विस्फुरिताधरः॥ ३५
उन्हें अपने पुत्रोंकी कर्तव्यच्युतिसे बड़ा शोक हुआ और वे नारदजीपर बड़े क्रोधित हुए। उनके मिलनेपर क्रोधके मारे दक्षप्रजापतिके होठ फड़कने लगे और वे आवेशमें भरकर नारदजीसे बोले॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 728) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/35/