यद्यपि शुक्राचार्यने अपने नीतिबलसे असुरोंकी सम्पत्ति सुरक्षित कर दी थी, फिर भी समर्थ विश्वरूपने वैष्णवी विद्याके प्रभावसे उनसे वह सम्पत्ति छीनकर देवराज इन्द्रको दिला दी॥ ३९॥
सुरद्विषां श्रियं गुप्तामौशनस्यापि विद्यया।
आच्छिद्यादान्महेन्द्राय वैष्णव्या विद्यया विभुः॥ ३९
यद्यपि शुक्राचार्यने अपने नीतिबलसे असुरोंकी सम्पत्ति सुरक्षित कर दी थी, फिर भी समर्थ विश्वरूपने वैष्णवी विद्याके प्रभावसे उनसे वह सम्पत्ति छीनकर देवराज इन्द्रको दिला दी॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 738) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/7/39/