यया गुप्तः सहस्राक्षो जिग्येऽसुरचमूर्विभुः।
तां प्राह स महेन्द्राय विश्वरूप उदारधीः॥ ४०
राजन्! जिस विद्यासे सुरक्षित होकर इन्द्रने असुरोंकी सेनापर विजय प्राप्त की थी, उसका उदारबुद्धि विश्वरूपने ही उन्हें उपदेश किया था॥ ४०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.40 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 738) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/7/40/