॥ श्रीहरिः ॥
येनावृता इमे लोकास्तमसा त्वाष्ट्रमूर्तिना।
स वै वृत्र इति प्रोक्तः पापः परमदारुणः॥ १८
yenāvṛtā ime lokāstamasā tvāṣṭramūrtinā|
sa vai vṛtra iti proktaḥ pāpaḥ paramadāruṇaḥ|| 18
अर्थ
परीक्षित्! त्वष्टाके तमोगुणी पुत्रने सारे लोकोंको घेर लिया था। इसीसे उस पापी और अत्यन्त क्रूर पुरुषका नाम वृत्रासुर पड़ा॥ १८॥
येनावृता इमे लोकास्तमसा त्वाष्ट्रमूर्तिना।
स वै वृत्र इति प्रोक्तः पापः परमदारुणः॥ १८
परीक्षित्! त्वष्टाके तमोगुणी पुत्रने सारे लोकोंको घेर लिया था। इसीसे उस पापी और अत्यन्त क्रूर पुरुषका नाम वृत्रासुर पड़ा॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 745) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/9/18/