श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.9.18

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

येनावृता इमे लोकास्तमसा त्वाष्ट्रमूर्तिना।

स वै वृत्र इति प्रोक्तः पापः परमदारुणः॥ १८

yenāvṛtā ime lokāstamasā tvāṣṭramūrtinā|

sa vai vṛtra iti proktaḥ pāpaḥ paramadāruṇaḥ|| 18

अर्थ

परीक्षित्! त्वष्टाके तमोगुणी पुत्रने सारे लोकोंको घेर लिया था। इसीसे उस पापी और अत्यन्त क्रूर पुरुषका नाम वृत्रासुर पड़ा॥ १८॥

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