श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.9.55

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

तस्मिन् विनिहते यूयं तेजोऽस्त्रायुधसम्पदः।

भूयः प्राप्स्यथ भद्रं वो न हिंसन्ति च मत्परान्॥ ५५

tasmin vinihate yūyaṃ tejo'strāyudhasampadaḥ|

bhūyaḥ prāpsyatha bhadraṃ vo na hiṃsanti ca matparān|| 55

अर्थ

देवताओ! वृत्रासुरके मर जानेपर तुम लोगोंको फिरसे तेज, अस्त्र-शस्त्र और सम्पत्तियाँ प्राप्त हो जायँगी। तुम्हारा कल्याण अवश्यम्भावी है; क्योंकि मेरे शरणागतोंको कोई सता नहीं सकता॥ ५५॥

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां षष्ठस्कन्धे नवमोऽध्यायः॥ ९॥

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