श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.10.1

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

अथ दशमोऽध्यायः

देवताओंद्वारा दधीचि ऋषिकी अस्थियोंसे वज्र-निर्माण और वृत्रासुरकी सेनापर आक्रमण

श्रीशुक उवाच

इन्द्रमेवं समादिश्य भगवान् विश्‍वभावनः।

पश्यतामनिमेषाणां तत्रैवान्तर्दधे हरिः॥ १

indramevaṃ samādiśya bhagavān viśvabhāvanaḥ|

paśyatāmanimeṣāṇāṃ tatraivāntardadhe hariḥ|| 1

अर्थ

श्रीशुकदेवजी कहते हैं—परीक्षित्! विश्‍वके जीवनदाता श्रीहरि इन्द्रको इस प्रकार आदेश देकर देवताओंके सामने वहीं-के-वहीं अन्तर्धान हो गये॥ १॥

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