अब देवताओंने उदारशिरोमणि अथर्ववेदी दधीचि ऋषिके पास जाकर भगवान्के आज्ञानुसार याचना की। देवताओंकी याचना सुनकर दधीचि ऋषिको बड़ा आनन्द हुआ। उन्होंने हँसकर देवताओंसे कहा—॥ २॥
तथाभियाचितो देवैर्ऋषिराथर्वणो महान्।
मोदमान उवाचेदं प्रहसन्निव भारत॥ २
अब देवताओंने उदारशिरोमणि अथर्ववेदी दधीचि ऋषिके पास जाकर भगवान्के आज्ञानुसार याचना की। देवताओंकी याचना सुनकर दधीचि ऋषिको बड़ा आनन्द हुआ। उन्होंने हँसकर देवताओंसे कहा—॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.10.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 753) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/10/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
#1088 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): देवैऋर्षिराथर्वणो → देवैऋर्ऋषिराथर्वणो
#1089 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): देवैऋर्ऋषिराथर्वणो → देवैर्ऋषिराथर्वणो