श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.16

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एतद्वेदितुमिच्छामः सर्व एव वयं मुने।

भगवन्‍निन्दया वेनो द्विजैस्तमसि पातितः॥ १६

etadveditumicchāmaḥ sarva eva vayaṃ mune|

bhagavannindayā veno dvijaistamasi pātitaḥ|| 16

अर्थ

नारदजी! इसका रहस्य हम सभी जानना चाहते हैं। पूर्वकालमें भगवान्‌की निन्दा करनेके कारण ऋषियोंने राजा वेनको नरकमें डाल दिया था॥ १६॥✎ 564 565 566 567

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #564 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #565 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से
  • #566 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #567 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् से → भगवान्‌से

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