श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.38

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

एवं शप्तौ स्वभवनात् पतन्तौ तैः कृपालुभिः।

प्रोक्तौ पुनर्जन्मभिर्वां त्रिभिर्लोकाय कल्पताम्॥ ३८

evaṃ śaptau svabhavanāt patantau taiḥ kṛpālubhiḥ|

proktau punarjanmabhirvāṃ tribhirlokāya kalpatām|| 38

अर्थ

उनके इस प्रकार शाप देते ही जब वे वैकुण्ठसे नीचे गिरने लगे, तब उन कृपालु महात्माओंने कहा—‘अच्छा, तीन जन्मोंमें इस शापको भोगकर तुमलोग फिर इसी वैकुण्ठमें आ जाना’॥ ३८॥

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