युधिष्ठिर! वे ही दोनों दितिके पुत्र हुए। उनमें बड़ेका नाम हिरण्यकशिपु था और उससे छोटेका हिरण्याक्ष। दैत्य और दानवोंके समाजमें यही दोनों सर्वश्रेष्ठ थे॥ ३९॥✎ 577
जज्ञाते तौ दितेः पुत्रौ दैत्यदानववन्दितौ।
हिरण्यकशिपुर्ज्येष्ठो हिरण्याक्षोऽनुजस्ततः॥ ३९
युधिष्ठिर! वे ही दोनों दितिके पुत्र हुए। उनमें बड़ेका नाम हिरण्यकशिपु था और उससे छोटेका हिरण्याक्ष। दैत्य और दानवोंके समाजमें यही दोनों सर्वश्रेष्ठ थे॥ ३९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.39 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 809) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/1/39/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#577 शब्दोंके बीचका स्थान: विष्णुभगवान् ने → विष्णुभगवान्ने