श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.21

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

भवन्ति पुरुषा लोके मद्भक्तास्त्वामनुव्रताः।

भवान्मे खलु भक्तानां सर्वेषां प्रतिरूपधृक्॥ २१

bhavanti puruṣā loke madbhaktāstvāmanuvratāḥ|

bhavānme khalu bhaktānāṃ sarveṣāṃ pratirūpadhṛk|| 21

अर्थ

संसारमें जो लोग तुम्हारे अनुयायी होंगे, वे भी मेरे भक्त हो जायँगे। बेटा! तुम मेरे सभी भक्तोंके आदर्श हो॥ २१॥✎ 626 2024

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #626 शब्दोंके बीचका स्थान: श्रीनृसिंहभगवान् ने → श्रीनृसिंहभगवान्‌ने
  • #2024 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): ढि़ → ढ़ि

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