॥ श्रीहरिः ॥
शयानौ युधि निर्भिन्नहृदयौ रामसायकैः।
तच्चित्तौ जहतुर्देहं यथा प्राक्तनजन्मनि॥ ३७
śayānau yudhi nirbhinnahṛdayau rāmasāyakaiḥ|
taccittau jahaturdehaṃ yathā prāktanajanmani|| 37
अर्थ
युद्धमें भगवान् रामके बाणोंसे उनका कलेजा फट गया। वहीं पड़े-पड़े पूर्वजन्मकी भाँति भगवान्का स्मरण करते-करते उन्होंने अपने शरीर छोड़े॥ ३७॥
शयानौ युधि निर्भिन्नहृदयौ रामसायकैः।
तच्चित्तौ जहतुर्देहं यथा प्राक्तनजन्मनि॥ ३७
युद्धमें भगवान् रामके बाणोंसे उनका कलेजा फट गया। वहीं पड़े-पड़े पूर्वजन्मकी भाँति भगवान्का स्मरण करते-करते उन्होंने अपने शरीर छोड़े॥ ३७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.37 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 871) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/37/