श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.38

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ताविहाथ पुनर्जातौ शिशुपालकरूषजौ।

हरौ वैरानुबन्धेन पश्यतस्ते समीयतुः॥ ३८

tāvihātha punarjātau śiśupālakarūṣajau|

harau vairānubandhena paśyataste samīyatuḥ|| 38

अर्थ

वे ही अब इस युगमें शिशुपाल और दन्तवक्‍त्रके रूपमें पैदा हुए थे। भगवान्‌के प्रति वैरभाव होनेके कारण तुम्हारे सामने ही वे उनमें समा गये॥ ३८॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें