श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.39

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

एनः पूर्वकृतं यत् तद् राजानः कृष्णवैरिणः।

जहुस्त्वन्ते तदात्मानः कीटः पेशस्कृतो यथा॥ ३९

enaḥ pūrvakṛtaṃ yat tad rājānaḥ kṛṣṇavairiṇaḥ|

jahustvante tadātmānaḥ kīṭaḥ peśaskṛto yathā|| 39

अर्थ

युधिष्ठिर! श्रीकृष्णसे शत्रुता रखनेवाले सभी राजा अन्तसमयमें श्रीकृष्णके स्मरणसे तद्रूप होकर अपने पूर्वकृत पापोंसे सदाके लिये मुक्त हो गये। जैसे भृंगीके द्वारा पकड़ा हुआ कीड़ा भयसे ही उसका स्वरूप प्राप्त कर लेता है॥ ३९॥

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