श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.40

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

यथा यथा भगवतो भक्‍त्या परमयाभिदा।

नृपाश्चैद्यादयः सात्म्यं हरेस्तच्चिन्तया ययुः॥ ४०

yathā yathā bhagavato bhaktyā paramayābhidā|

nṛpāścaidyādayaḥ sātmyaṃ harestaccintayā yayuḥ|| 40

अर्थ

जिस प्रकार भगवान्‌के प्यारे भक्त अपनी भेद-भावरहित अनन्य भक्तिके द्वारा भगवत्स्वरूपको प्राप्त कर लेते हैं, वैसे ही शिशुपाल आदि नरपति भी भगवान्‌के वैरभावजनित अनन्य चिन्तनसे भगवान्‌के सारूप्यको प्राप्त हो गये॥ ४०॥

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