यही भगवान् विष्णु उस समय गौ बन गये और ब्रह्माजी बछड़ा बने। दोनों ही मध्याह्नके समय उन तीनों पुरोंमें गये और उस सिद्धरसके कुएँका सारा अमृत पी गये॥ ६२॥
वत्स आसीत्तदा ब्रह्मा स्वयं विष्णुरयं हि गौः।
प्रविश्य त्रिपुरं काले रसकूपामृतं पपौ॥ ६२
यही भगवान् विष्णु उस समय गौ बन गये और ब्रह्माजी बछड़ा बने। दोनों ही मध्याह्नके समय उन तीनों पुरोंमें गये और उस सिद्धरसके कुएँका सारा अमृत पी गये॥ ६२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.62 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 873) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/10/62/