सायंकाल और प्रातःकाल भिक्षा माँगकर लावे और उसे गुरुजीको समर्पित कर दे। वे आज्ञा दें, तब भोजन करे और यदि कभी आज्ञा न दें तो उपवास कर ले॥ ५॥
सायं प्रातश्चरेद्भैक्षं गुरवे तन्निवेदयेत्।
भुञ्जीत यद्यनुज्ञातो नो चेदुपवसेत् क्वचित्॥ ५
सायंकाल और प्रातःकाल भिक्षा माँगकर लावे और उसे गुरुजीको समर्पित कर दे। वे आज्ञा दें, तब भोजन करे और यदि कभी आज्ञा न दें तो उपवास कर ले॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.12.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 879) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/12/5/