नारदजी कहते हैं—धर्मराज! जब प्रह्लादजीने महामुनि दत्तात्रेयजीसे इस प्रकार प्रश्न किया, तब वे उनकी अमृतमयी वाणीके वशीभूत हो मुसकराते हुए बोले॥ १९॥
स इत्थं दैत्यपतिना परिपृष्टो महामुनिः।
स्मयमानस्तमभ्याह तद्वागमृतयन्त्रितः॥ १९
नारदजी कहते हैं—धर्मराज! जब प्रह्लादजीने महामुनि दत्तात्रेयजीसे इस प्रकार प्रश्न किया, तब वे उनकी अमृतमयी वाणीके वशीभूत हो मुसकराते हुए बोले॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.13.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 885) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/13/19/