श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.13.20

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

ब्राह्मण उवाच

वेदेदमसुरश्रेष्ठ भवान् नन्वार्यसम्मतः।

ईहोपरमयोर्नॄणां पदान्यध्यात्मचक्षुषा॥ २०✎ 1104

vededamasuraśreṣṭha bhavān nanvāryasammataḥ|

īhoparamayornṝṇāṃ padānyadhyātmacakṣuṣā|| 20

अर्थ

दत्तात्रेयजीने कहा—दैत्यराज! सभी श्रेष्ठ पुरुष तुम्हारा सम्मान करते हैं। मनुष्योंको कर्मोंकी प्रवृत्ति और उनकी निवृत्तिका क्या फल मिलता है, यह बात तुम अपनी ज्ञानदृष्टिसे जानते ही हो॥ २०॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1104 अक्षर (मुद्रित पृष्ठके पाठसे): ईहोपरमयोर्नृणां → ईहोपरमयोर्नॄणां

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