श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.13.21

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

यस्य नारायणो देवो भगवान्हृद्गतः सदा।

भक्‍त्या केवलयाज्ञानं धुनोति ध्वान्तमर्कवत्॥ २१

yasya nārāyaṇo devo bhagavānhṛdgataḥ sadā|

bhaktyā kevalayājñānaṃ dhunoti dhvāntamarkavat|| 21

अर्थ

तुम्हारी अनन्य भक्तिके कारण देवाधिदेव भगवान् नारायण सदा तुम्हारे हृदयमें विराजमान रहते हैं और जैसे सूर्य अन्धकारको नष्ट कर देते हैं, वैसे ही वे तुम्हारे अज्ञानको नष्ट करते रहते हैं॥ २१॥

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