श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.13.9

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 13 · अथ त्रयोदशोऽध्यायः

न यतेराश्रमः प्रायो धर्महेतुर्महात्मनः।

शान्तस्य समचित्तस्य बिभृयादुत वा त्यजेत्॥ ९

na yaterāśramaḥ prāyo dharmaheturmahātmanaḥ|

śāntasya samacittasya bibhṛyāduta vā tyajet|| 9

अर्थ

शान्त, समदर्शी एवं महात्मा संन्यासीके लिये किसी आश्रमका बन्धन धर्मका कारण नहीं है। वह अपने आश्रमके चिह्नोंको धारण करे, चाहे छोड़ दे॥ ९॥

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